Monday, May 21

बिखरते ख्वाब




थी मैं परेशान, ख्वाब जो बिखरते जा रहे थे
हुआ सामना फिर हकीकत से ..
उसने कहा मुझसे, थे तेरे ख्वाब बहुत छोटे इसलिए बिखर गये
हैं तेरी किस्मत में जन्नत के ख्वाब
हूँ मैं इंतजार में, बड़े ख्वाब मांगेगी कब तू मुझसे
अब ख्वाब के बिखरने या टूटने पर मैं टूटती नहीं
क्यूंकि हैं यकीन मुझे हकीकत की सच्चाई पे
जो छिपी बैठी है कहीं
आखिर कब तक आँख मिचौली खेलेगी हकीकत की सच्चाई मुझसे...

दीपिका




5 comments:

  1. आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज ३० मई, २०१३, बृहस्पतिवार के ब्लॉग बुलेटिन - जीवन के कुछ सत्य अनुभव पर लिंक किया है | बहुत बहुत बधाई |

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  2. वाह ,बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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