Thursday, December 30

तुम्हारे साथ

तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है
कि दिशाएँ पास आ गयी हैं,
हर रास्ता छोटा हो गया है,
दुनिया सिमटकर
एक आँगन-सी बन गयी है
जो खचाखच भरा है,
कहीं भी एकान्त नहीं
न बाहर, न भीतर।

3 comments:

  1. accha likha hai
    aise he likhte rehe
    ol the best

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  2. cool yaar......acha likha hai.........

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  3. bhout bhadiya ...keep it up..''..

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