tumhare saath
ek kadam roshni ki aur...
Thursday, December 30
हम रो रोकर लिखते हैं वो यूं हंसकर पढ़ जाते हैं
हम
रो
रोकर लिखते हैं वो यूं हंसकर पढ़ जाते हैं .........
जो सपनों को तोड़ चुके हैं वो सपनों में आते है
आंसूं बरसाती आंखों ने टूटे ख्वाबों को ढोया
वादों की यादों में पड़कर जाने मन कितना रोया
हम रो रोकर लिखते हैं वो यूं हंसकर पढ़ जाते हैं .........
2 comments:
$ZIAUDDIN$
January 4, 2011 at 12:24 AM
wah ! kya baat haie...
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mohan singh
January 7, 2011 at 8:22 AM
koi baat nahi kabhi rona bhi chahy
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wah ! kya baat haie...
ReplyDeletekoi baat nahi kabhi rona bhi chahy
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